समझौते के अनुसार, आउटसोर्सिंग कंपनी पीएनसी में 70 फीसदी स्थानीय प्रभावित ग्रामीणों को प्राथमिकता के साथ रोजगार देना था। बसाहट स्थल पर लंबित विकास कार्यों को तत्काल शुरू करने की भी मांग है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यह केवल सांकेतिक विरोध नहीं है। यदि प्रबंधन और प्रशासन तत्काल ठोस निर्णय नहीं लेते हैं, तो पंद्रह अप्रैल दो हजार छब्बीस से खदान के समीप अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया जाएगा।







