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'तीन करोड़ लोगों को फिर से गरीबी के गर्त में धकेलेगा ईरान युद्ध', संयुक्त राष्ट्र ने किया आगाह

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बैंकॉक। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के प्रमुख अलेक्जेंडर डी क्रू ने बृहस्पतिवार चेतावनी दी कि ईरान युद्ध के असर से तीन करोड़ से अधिक की आबादी फिर से गरीबी में जीने को मजबूर होगी। यहीं नहीं, ईंधन और किसानों के ठीक फसल बोने के वक्त उर्वरक आपूर्ति में भी रुकावटें आएंगी। यूएनडीपी प्रशासक क्रू ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से आने वाले मालवाहक जहाजों को अवरुद्ध करने से उर्वरकों की कमी से कृषि उत्पादन घटा है। इससे इस साल के आखिर में फसल की पैदावार पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि कुछ महीनों में खाद्य संकट का खतरा अपने उच्चतम स्तर पर होगा और आप इसके बारे में अधिक कुछ नहीं कर सकते। इसके साथ ही ऊर्जा की कमी और कम होती आय भी दिक्कतें बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया उर्वरक का बड़ा उत्पादक है और इसका एक-तिहाई हिस्सा होर्मुज से गुजरता है। डी क्रू ने कहा, दशकों में बनी चीजों को खत्म करने में महज आठ हफ्ते का युद्ध काफी है। भले ही युद्ध कल ही बंद हो जाए, लेकिन इसके असर पहले से ही हैं और ये तीन करोड़ अधिक लोगों को गरीबी में धकेल देगा। इस महीने के शुरू में, विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम ने आगाह किया था कि युद्ध खाद्य कीमतों को बढ़ाएगा, जिससे दुनिया की सबसे कमजोर आबादी पर और बोझ पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि इस संकट के असर से पहले ही वैश्विक जीडीपी में 0.5 फीसदी से 0.8 फीसदी तक की गिरावट आ चुकी है। सूडान, गाजा और यूक्रेन जैसे क्षेत्रों में मदद कम पड़ रही है, जिससे कई लोग और ज्यादा संकट में आ सकते हैं। उन्होंने कहा, जिन चीजों को बनने में दशकों लगते हैं, उन्हें खत्म करने में महज आठ हफ्ते का युद्ध ही काफी होता है।

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