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ईरान बोला- शत्रुता छोड़े US तो होर्मुज से गुजरने देंगे जहाज; वेंस को सकारात्मक बातचीत की उम्मीद

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इस्लामाबाद। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव को खत्म करने की दिशा में एक अहम पहल के तहत ईरानी प्रतिनिधिमंडल शनिवार तड़के इस्लामाबाद पहुंच गया। इस बहुप्रतीक्षित वार्ता को लेकर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इससे पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को विराम मिलने की उम्मीद है। ईरान का प्रतिनिधिमंडल संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ के नेतृत्व में पहुंचा, जिसमें विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी शामिल हैं। इस्लामाबाद पहुंचने पर पाकिस्तान के वरिष्ठ नेताओं ने उनका स्वागत किया। इस दौरान उपप्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री इशाक डार समेत कई शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे।

ईरान बोला- शत्रुता छोड़े US तो होर्मुज से गुजरने देंगे जहाज
ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खातिबजादेह का कहना है कि अमेरिकी जहाज भी होर्मुज से गुजर सकते हैं, बशर्ते अमेरिका शत्रुता छोड़ दे। खातिबजादेह ने ईरानी मीडिया को बताया कि होर्मुज खुला है, लेकिन तकनीकी कारणों से जहाजों के लिए ईरानी सेनाओं के साथ संपर्क बनाए रखना जरूरी है। हम होर्मुज में अपने सुरक्षित मार्गों के माध्यम से उनकी सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करेंगे। इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की आलोचना करते हुए कहा था कि वह होर्मुज जलमार्ग से तेल परिवहन में बहुत खराब व्यवस्था कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह वह समझौता नहीं है जो हमारे बीच हुआ था।
वेंस बोले- स्थायी युद्ध विराम पर सकारात्मक बातचीत की उम्मीद
इस बीच पाकिस्तान रवाना होने से पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस ने कहा, हम वार्ता की प्रतीक्षा कर रहे हैं। मुझे लगता है कि यह सकारात्मक होगी। यदि ईरानी सद्भावना से बातचीत करने को तैयार हैं, तो हम उनका हाथ थामने को तैयार हैं। लेकिन अगर वे हमें मूर्ख बनाने की कोशिश करेंगे, तो हमसे भी सहयोग की उम्मीद न रखें। उधर इस्राइल ने भी अपना रुख कुछ नरम करते हुए कहा कि वह लेबनान के साथ सीधी बातचीत करने के लिए तैयार है।
संयुक्त राष्ट्र ने शांति वार्ता का किया स्वागत
इस बीच संयुक्त राष्ट्र ने इस पहल का स्वागत किया है। महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दोनों पक्षों से अपील की है कि वे इस अवसर का उपयोग करते हुए स्थायी और शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ें। संयुक्त राष्ट्र ने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान केवल कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत ही संभव है।    

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